स्त्री की कहानी, स्त्री की जुबानी | जीवन की शुरुआत ही स्त्री से होती है, स्त्री ना हो तो इस जीवन की शुरुआत होना असंभव सा जान पड़ता है | यह प्रकृति, Nature नेचर, भी एक स्त्री है, यह हमारी सभी जरूरतों को समय समय पर पूर्ण करती रहती है परंतु अपनी जरूरतों के बारे में किसी से कुछ नहीं कहती, इसी प्रकार का स्वभाव नारी का भी है, स्त्री सभी के लिए कुछ न कुछ करती ही रहती है परंतु उसके बारे में कोई कुछ नहीं करता और वह फिर भी खुश है | स्त्री के साथ तो बहुत जन्मों से अन्याय ही होता चला आ रहा है. आप सभी तो जानते ही हैं कि स्त्री का कोई महत्व ही नहीं था पहले की कोई युगों में | स्त्री अपनी कहानी स्वयं कहती है, यह प्रकृति मां भी अपनी कहानी स्वयं ही कहती है, स्त्री (प्रकृति) कहती है, जबसे मेरा जन्म हुआ है, इस दुनिया में, तब से लेकर आज तक, सभी मेरा उपयोग ही करते आए हैं, कभी किसी ने मुझे बचाने, संरक्षण करने, का कोई भी कर्तव्य निभाने में पहल नहीं की | आज दुनिया जिस प्रकार की दिखाई देती है यह सब कर्मों का फल है इस प्रकृति का | स्त्री कौन है | स्त्री के अनेकों नाम है. स्त्री घर की लक्ष्म...
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