मोसम का रहस्य जो जुड़ा हे जीवन के
विस्तार से
मोसम
के बदलाव से हमे पता चलता हे,
की
यही हालत, हमारे भीतर भी,
इसी प्रकार होती रहती हे,
बदलती
रहती हे, हर पल मे,
वही सिखाती हे जो ये
कविता
हमे बताने जा रही हे,
गर्मियो के दिनो मे, तपती हुई ये,
रोशनी,
उड़ा ले जाती हे, फुलो की खुशबू कहीं,
हवाए
गर्म होती हे, पसीना सुख जाता हे,
धधकती
इस दोपहर मे सभी कुछ छूट जाता हे,
गले
मे प्यास हे अटकी, ओर पानी भी नही ठण्डा,
खड़े
हे रेगिश्तान मे, नही हे हाथ मे
डंडा,
मंज़िल
दूर हे कितनी, रोशनी बड़ाती
जाती हे,
सुबहा
की खिलती ठंडक की, याद हर पल सताती हे,
शाम
की नर्म ठंडक, यू ही मुस्कुराती
हे,
मोसम
गर्म हे कितना, यह हम को समझती हे,
कभी
गर्मी लाती हे, तो कभी ठंड आती
हे, मोसम बदलती ये
क़ुदरता,
हमे
जीना सिखाती हे, कभी ये रूठ जाती हे कभी ये मुस्कुराती हे,
बदलते
मोसम के सदा ये गीत
गाती हे,
#क्या गीत गाती हे, #क्या गीत गाती हे,
#मोसम आते हे ओर चले जाते हे,
गम
की बरसात हे खुशियो का खजाना,
#दिल अपना सदियो पुराना हे मंज़िल जो हे
इसकी बस इसे ही पाना हे,
आता
जमाना हे गुजर जाता जमाना हे,
अपनी
#मंज़िल का
रास्ता हमे खुद मिलकर बनाना हे,
खिलती
दोपहर मे, बच्चो
की सरारत,
नन्हे
नन्हे कदमो की आहात्ट,
बच्चो
की किलकरिया, दिल
मे उतर जाती हे,
खिलती
#दोपहर यही तो
बताती हे,
भीड़
मे चलते हे, सभी लोग अंजान हे,
बच्चे
सा दिल दोपहर मे परेशान हे,
थोड़ी
#मस्ती यह
दोहराती हे,
खुशिया
हर पल मे जीना सीखा जाती हे, लोटा
आती हे,
ओर, ओर, फिर क्या #####दोपहर फिर से मुस्कुराती हे,
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