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*“रामायण” क्या है??*

 *“रामायण” क्या है ??* रामायण हमारे जीवन का एक बहुत बड़ा हिस्सा है जो हमें शिक्षा देता है जीवन क्या है? अगर कभी पढ़ो और समझो तो आंसुओ पे स्टेक रखना....... शायद कुछ समझा... 😊 एक रात की बात है, माता कवच्या जी को अपने महल की छत पर सोते हुए किसी पंक्ति में सुनाई दिया।  नींद खुल गई,पूछा कौन हैं ? आसानी से श्रुतकीर्ति जी (सबसे छोटी शत्रुघ्न जी की पत्नी)हैं । माता कौशल्या जी ने उन्हें नीचे बुलाया | श्रुतकीर्ति जी आईं, मंच में प्रणाम कर दिए गए कारण बने माता कौसिल्या जी ने पूछा, श्रुति ! इतनी रात को छत पर क्या कर सकती है बेटी?  क्या नींद नहीं आ रही है ? शत्रुघ्न कहाँ है ? श्रुतिकीर्ति की नींद भर आई,माँ की छाती से चिपकी,  गोद में सिमट गए,बोलीं,माँ उन्हें तो देखे हुए तेरह साल हो गए। उफ !  कौशल्या जी का ह्रदय काँप कर झटपटा गया। फुंफकारती आवाज,सेवक दौड़े आए।  आधी रात को ही पालकी तैयार हो गई, आज शत्रुघ्न जी की खोज होगी,  मैं चला गया। आप आसानी से शत्रुघ्न जी कहाँ मिले हैं ? अयोध्या जी के जिस दरवाजे के बाहर भरत जी नंदिगराम में तपस्वी रहते हैं, उसी दरवाजे के भीतर एक प...
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🌷🌷 भक्त_की_परीक्षा🌷🌷

 #भक्त_की_परीक्षा 🌷🌷🌷 .🌹🙏शुभ 🙏🌹 एक गाँव के बाहरी हिस्से में एक वृद्ध साधु बाबा छोटी से कुटिया बना कर रहते थे।  वह ठाकुर जी के परम भक्त थे। स्वभाव बहुत ही शान्त और सरल। दिन-रात बस एक ही कार्य था, बस ठाकुर जी के ध्यान-भजन में खोये रहना। ना खाने की चिंता ना पीने की, चिंता रहती थी तो बस एक कि ठाकुर जी की सेवा कमी ना रह जाए। भोर से पूर्व ही जाग जाते, स्नान और नित्य कर्म से निवृत्त होते ही लग जाते ठाकुर जी की सेवा में।  .उनको स्नान कराते, धुले वस्त्र पहनाते, चंदन से तिलक करते, पुष्पों की माला पहनाते फिर उनका पूजन भजन आदि करते जंगल से लाये गए फलों से ठाकुर जी को भोग लगाते। बिलकुल वैरागी थे, किसी से विशेष कुछ लेना देना नहीं था। फक्कड़ थे किन्तु किसी के आगे हाथ नहीं फैलाते थे। यदि कोई कुछ दे गया तो स्वीकार कर लिया नहीं तो राधे-राधे।फक्कड़ होने पर भी एक विशेष गुण उनमे समाहित था, उनके द्वार पर यदि कोई भूखा व्यक्ति आ जाए तो वह उसको बिना कुछ खिलाए नहीं जाने देते थे। कुछ नहीं होता था तो जंगल से फल लाकर ही दे देते थे किन्तु कभी किसी को भूखा नहीं जाने दिया। यही स्थिति ठाकुर जी के प्...

शिव तत्व क्या है

शिव तत्व क्या है, इसके बारे में जानते हैं शिव तत्व सिर्फ केवल शिव की एक शक्ति है शिव तत्व का मतलब है शिव जैसा पार शक्तिशाली धार्मिक दयावान बुद्धिमान महान और 20 से भी अधिक शब्दों की कमी नहीं है ईश्वर के रूप को कहने की परंतु शिव तत्व शिव तत्व तो उससे भी महान है शिव तत्व का सीधा अर्थ यह है कि आप अपने वीर्य को अपने शरीर से निकलने ना दे अगर जितना ही वीडियो पुराना होता जाएगा आपकी आध्यात्मिकता के अंदर समृति पड़ती जाएगी और आप एक दिन शुभ हो जाएंगे बस इतना ही संसार और शिव में फर्क है शिव ने अपना भी संभाल रखा है और आम इंसान इस धरती पर रहने वाला प्रत्येक मनुष्य अपना वीर्य नहीं संभाल पाता उसे एक ना एक दिन इस फलित होना ही पड़ता है बस तथास्तु शिव तत्व का एक और भी गहरा राज है शिव तत्व का अर्थ है भलाई सेवा लोगों की रक्षा करना ईश्वर के बनाए स्वरूप की रक्षा करना उसके बनाए धर्म की सत्य की रक्षा करना उसके बनाए नीति नियम की रक्षा करना नियम और प्रकृति की देखभाल करना यही उसका परम तत्व का ज्ञान है आपने तो सुना ही होगा कि भगवान शिव शंकर के दो पुत्र हैं प्रथम पुत्र हैं उनके सबसे बड़े पुत्र उनका नाम भगवान कार्...

#चार धाम की यात्रा की पूरी जानकारी, #यमूणोतरी, #गंगोत्री, #केदारनाथ, Bad...

क्या आप जानते हैं, इस दुनिया का निर्माण क्यों हुआ है ?

क्या आप जानते हैं, इस दुनिया का निर्माण क्यों हुआ है ? अगर, आप यह नहीं जानते तो आप अपनी जिंदगी को देखिए, आपने अपनी जिंदगी में क्या करना चाहा है, आपने ही तो अपनी जिंदगी का निर्माण किया है, और इसी आधार पर इस सृष्टि का निर्माण हुआ है। हमारे हिंदू समाज में, हिंदू धर्मों में यही बताया गया है कि 1 ज्योतिर्लिंग, ज्योतिर्लिंग प्रकट हुआ और उसी ने दो महान पुरुषों को जन्म दिया और उन्हें इस सृष्टि का कार्यभार संभालने के लिए नियुक्त किया।  यह कहानी सृष्टि के जन्म की कहानी, एक पति और पत्नी के-बातचीत से निर्मित हुई है। पति और पत्नी का जिक्र आया है तो मैं इसके बारे में आप सभी को बता दूं, कि दुनिया में पति-पत्नी का ही एक ऐसा रिश्ता होता है जो एक और दूसरे के मिलने से होता है. यह किसी के द्वारा उत्पन्न नहीं होता। माता-पिता का रिश्ता, मां-बेटे का रिश्ता, बा प- बेटे का रिश्ता, भाई-बहन का रिश्ता, मां-बेटी का रिश्ता, बाप-बेटी का रिश्ता, यह रिश्ते ऐसे होते हैं, जो खून के रिश्ते होते हैं, जो जन्म के साथ ही उपहार स्वरुप में हमें प्राप्त होते हैं. परंतु पत्नी और पति का जो रिश्ता होता है, वह समाज...

The Women Tells Her Own Story (स्त्री अपनी कहानी स्वयं ही कहती है).

स्त्री की कहानी, स्त्री की जुबानी | जीवन की शुरुआत ही स्त्री से होती है, स्त्री ना हो तो इस जीवन की शुरुआत होना असंभव सा जान पड़ता है | यह प्रकृति, Nature नेचर, भी एक स्त्री है, यह हमारी सभी जरूरतों को समय समय पर पूर्ण करती रहती है परंतु अपनी जरूरतों के बारे में किसी से कुछ नहीं कहती, इसी प्रकार का स्वभाव नारी का भी है, स्त्री सभी के लिए कुछ न कुछ करती ही रहती है परंतु उसके बारे में कोई कुछ नहीं करता और वह फिर भी खुश है | स्त्री के साथ तो बहुत जन्मों से अन्याय ही होता चला आ रहा है. आप सभी तो जानते ही हैं कि स्त्री का कोई महत्व ही नहीं था पहले की कोई युगों में | स्त्री अपनी कहानी स्वयं कहती है, यह प्रकृति मां भी अपनी कहानी स्वयं ही कहती है, स्त्री (प्रकृति) कहती है, जबसे मेरा जन्म हुआ है, इस दुनिया में, तब से लेकर आज तक, सभी मेरा उपयोग ही करते आए हैं, कभी किसी ने मुझे बचाने, संरक्षण करने, का कोई भी कर्तव्य निभाने में पहल नहीं की | आज दुनिया जिस प्रकार की दिखाई देती है यह सब कर्मों का फल है इस प्रकृति का |  स्त्री कौन है | स्त्री के अनेकों नाम है. स्त्री घर की लक्ष्म...

#Spiritual Gyan (ज्ञान)

#Spiritual Gyan (ज्ञान) अपने जीवन का फैसला हर व्यक्ति का अधिकार है, प्रत्येक व्यक्ति का जिंदगी का फैसला उसका अपना खुद का फैसला होता है, उसके लिए सबसे पहले, जिंदगी का रास्ता तय करना बहुत ही ज्यादा जरूरी है. रास्ता तय करना इसका मतलब, अपनी जिंदगी का लक्ष्य निर्धारित करना. परंतु लक्ष्य, लक्ष्य तो कोई बनाता ही नहीं. जो कोई लक्ष्य बनाता भी है, तो उसे समझ और ज्ञान नहीं, जिसमें समझ और ज्ञान है, तो उसे करने का तरीका नहीं जानता, कोई व्यक्ति करने का तरीका जानता है परंतु उसकी भावना स्वार्थी है. "जिसकी रही भावना जैसी" उसकी गति होए वैसी. यह सागर, भवसागर है, जहां पर भाव व्यक्त किए जाते हैं, भावना व्यक्त की जाती है, भावना से ही यह संसार चलता है, धर्म चलता है, सत्य चलता है, न्याय चलता है, मानवता चलती है, परंतु फिर भी, हम इस संसार की नाटक को देखते देखते अपने अपने खुद के बारे में फैसला करना भूल जाते हैं, यही है Spiritual Gyan (ज्ञान). अपनी जीवन का फैसला समय पर खुद लेना पड़ता है |