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जल के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती

सृष्टि के निर्माण के लिए, पंच तत्वों को आधार माना गया है, उसमें से एक तत्व  है, "पानी". पानी के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती. अगर पानी ही ना होगा, तो सृष्टि का निर्माण भी संभव नहीं है. जल का महत्व इस बात से भी समझा जा सकता है, कि जीवन का विस्तार नदियों के किनारे से ही हुआ है और पहले के लोग नदियों के किनारे ही अपना घर और आशियाना बनाया करते थे. प्राचीन नगर नदियों के तट पर ही बसा करते थे.विकास की अंधी दौड़ में प्राकृतिक संसाधनों का कोई मोल नहीं रह गया है, विलासिता की आड़ में मनुष्य पानी का कितना दोहन कर रहा है, आज दुनिया की आधी आबादी को पीने का स्वच्छ पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, अगर हम पानी का उचित प्रबंधन नहीं कर पाए तो हम आने वाले दिनों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस जाएंगे. आज भारत समेत दुनिया के कई देश पानी के लिए जूझ  रहे हैं. माना जाता है, 2030 तक कई शहरों में पानी खत्म होने की आशंका है.

भारत के कई शहर स्वच्छ पेयजल संकट से गुजर रहे हैं, इनमें चेन्नई सबसे ऊपर है, भारत ही नहीं, दुनिया के पानी के लिए जूझ रहे 400 शहरों में चेन्नई टॉप पर है. चेन्नई को पानी की सप्लाई करने वाली चार प्रमुख झीलें सूख चुकी है, चेन्नई में तो हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां कई कंपनियों ने पानी की समस्या के कारण कर्मचारियों को ऑफिस जाने से मना कर दिया है. 2.नंबर पर कोलकाता है, 3.मुंबई, और दिल्ली 15 नंबर पर है. जल संकट से जूझ रहे भारत के शहरों में ज्यादातर शहर नदियों के किनारे बसे हैं, यहां आबादी बहुत ज्यादा है और नदियों के पानी का ज्यादा इस्तेमाल किया गया है, चेन्नई और कोलकाता जैसे शहरों में जल स्त्रोत लगातार सूख रहे हैं और जिस रफ्तार से जंगल खत्म हो रहे हैं उस से 3 गुना अधिक रफ्तार से पानी के स्त्रोत सूख रहे हैं. देश के कई शहरों में जल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है भविष्य में इसके और गहराने के आसार दिख रहे हैं, 2099 तक पानी खत्म होने की कगार पर आ जाएगा, इसका सामना सबसे ज्यादा दिल्ली, बेंगलुरु और हैदराबाद के लोगों को करना पड़ेगा. पानी की परेशानी शुरू हो जाएगी. जीवन में हर लापरवाह इंसान|- दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन की राह पर चल रहे हैं. जनवरी 2018 में केपटाउन में हालात इतने खराब हो गए थे कि पानी भी राशन की तरह मिलने लगा था. दुनिया के 30% पानी का ग्राउंड वाटर लेवल गंभीर स्थिति में पहुंच गया है, शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के दबाव में भूजल का स्तर लगातार नीचे गिर रहा है अगर वक्त रहते जल संसाधनों के प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाली पीढ़ियों के लिए पानी नहीं मिल पाएगा या यूं कहें कि धरती पर जीवन धीरे-धीरे समाप्त, बिन पानी के जीवन संभव नहीं है.

पानी के संरक्षण के लिए कई सारे उपाय मौजूद है अपने पास, परंतु इसका उपयोग किस तरह से किया जा सकता है, इस के तौर तरीके और इसके नतीजे के बारे में सोचना पड़ेगा. सबसे पहले हमें पानी किस किस चीज के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है, यह पता होना चाहिए, और फिर किस किस चीज के लिए हम उसका कम से कम उपयोग कर सकते हैं, उसके बारे में पता होना चाहिए, अर्थात जिस जगह पानी का इस्तेमाल बहुत ही जरूरी है, वहीं पर किया जाना चाहिए, पानी का उपयोग हमारे दैनिक जीवन में कई जगह होता है जिसमें सर्वप्रथम पानी पीने के लिए उपयोग किया जाता है उसके बाद पानी का इस्तेमाल घर के कामकाज में उपयोगी होता है जिसमें कपड़े धोना भोजन बनाना और इसके अलावा झाड़ू पोछा बर्तन करने के लिए पानी का इस्तेमाल होता है. इन सब में भी पानी का इस्तेमाल कम से कम ही होता है, इस पर भी विचार करना बहुत ही आवश्यक है, कि कौन से ऐसे साधन है, जिनका हम पानी के सदुपयोग को बचाने के लिए इस्तेमाल करना सीख सकें और पानी का ज्यादा से ज्यादा उपयोग करने के बजाय कम से कम उपयोग करके पानी को बचा सकें. 

सर्वप्रथम हम पानी का इस्तेमाल बर्तन, कपड़े, नहाने और खाना बनाने के लिए करते हैं. यदि हम ऐसी कोई तकनीक बना सके जिसमें बर्तन धोना, कपड़ा धोना बहुत ही आसान हो जाए और जिसमें ऐसा तकनीक का इस्तेमाल हो कि उसमें कभी भी पानी की आवश्यकता ना हो, कपड़े मशीन में डालें और बढ़िया साफ़ होकर निकल आएं, लाख लोगों को पीने का साफ पानी नहीं है, ग्रामीण इलाकों में, 70 फ़ीसदी लोग प्रदूषित पानी पीने को मजबूर है. करोड़ लोग ऐसी जगह रहने को मजबूर है जहां हर साल भयंकर सूखा पड़ता है. पिछले 30 वर्षों के दौरान सूखे की वजह से भारत में 300000 से ज्यादा किसानों ने आत्महत्या की है, पानी की बोतल के 10,000 से ज्यादा अनाधिकृत कारखाने हैं दिल्ली एनसीआर में, 64 कारखानों के पास पानी की पैकिंग का लाइसेंस है, शहरों में गड़बड़ी की वजह से रोजाना लाखों लीटर पानी बेकार हो जाता है, बारिश का पानी समुद्र में चला जाता है, घर में पानी की किल्लत लोगों को हलकान कर रही है, लेकिन इस स्थिति के लिए हम ही जिम्मेदार है. जरूरत से ज्यादा पानी का इस्तेमाल और जल संरक्षण के लिए कोई उचित कदम नहीं उठाए, यानी जहां जमीन में पानी का स्तर खतरनाक स्तर के नीचे है, नदियों पर बांध बनाकर पानी का बहाव रोक दिया गया है, अंधाधुन निजी तौर पर बोरवेल से पानी का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल भी इसका एक मुख्य कारण है जिस वजह से पानी की बर्बादी होती है, सिर्फ किसान ही नहीं, घरेलू जरूरतों के लिए भी लोग सबमर्सिबल पंप लगवा रहे हैं.

पिछले कुछ वर्षों से मानसून की बारिश एक समान नहीं हुई है, यानी कुछ इलाकों में हद से ज्यादा पानी बरस गया और कई इलाके पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसते रह है. मानसून के सही समय पर ना आने का मुख्य कारण है वर्षा वनों की कटाई, जिस तरह पेड़ों की कटाई हो रही है, और जल के संसाधन जमीन में से धीरे-धीरे जमीन की गहराइयों में उतरते चले जा रहे हैं यह दोनों बढ़ती-आबादी से बहुत ही ज्यादा कनेक्टेड है, बहुत ही ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. भूमिगत जल एक संसाधन है लेकिन पानी की बर्बादी करने वालों के खिलाफ कोई दंडनीय प्रावधान भी नहीं है, धरती के गर्भ से अंधाधुंध जल को खींचा जा रहा है इस पर तत्काल प्रभाव लागू नहीं होता परंतु दीर्घकालीन में यह बहुत ही समस्या का केंद्र बन सकता है, और स्वच्छ जल भी बहुत ही ज्यादा प्रदूषित हो रहा है, जल संरक्षण पर सही ढंग से ध्यान नहीं दिया जा रहा है पैसा खर्चा करने के बावजूद. एक साथ मिलकर देश भर में पानी को बचाने और उस को सुरक्षित रखने के व्यापक रूप से कदम उठाए जा सकते हैं

जंगलों का उचित प्रबंध कर के पानी का संरक्षण किया जा सकता है. भूमिगत जल के दोहन पर भी रोक लगाई जा सकती है, नदी और नालों पर डैम बनाने की जरूरत है जिससे पानी को बहुत ही अच्छे तरीके से रिफाइंड फिल्टर करके दोबारा उपयोग में लाया जा सकता है. गंदे पानी को पीने लायक बनाया जा सकता है. नदियों का पानी, समुद्र में बह जाता है यदि इस जल को धरती के अंदर पहुंचा दिया जाए तो इसके लाभ होंगे, एक तो बाढ़ की समस्या कम होगी और दूसरी भूजल का स्तर भी बढ़ेगा. पानी को रोककर भूजल की गुणवत्ता में सुधार और उसकी रिफिलिंग क्षमता को बढ़ाया जा सकता है, वर्तमान स्थिति को सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग वर्षा के जल को इकट्ठा करना जैसी तकनीकों को भी लागू करने की जरूरत है.

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