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भारत का चंद्रयान-2

भारत का चंद्रयान-2
हमारे भारत का ChandraYaan-2 बहुत ही ऊंचाई पर जाकर एक लक्ष्य तक प्राप्त होना चाहता था परंतु कुछ कारणों की वजह से हमारे और ChandraYaan-2 के बीच में संपर्क टूट गया| जो विक्रम अपने प्रज्ञान के साथ खोज करके आने वाला था वह कहीं विलुप्त हो चुका है परंतु कोई नहीं जानता कि वह कहां है| हम सभी जानते ही हैं कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर अभी तक किसी भी देश का यान नहीं पहुंचा है| इसी प्रयास के साथ भारत ने इसकी तरफ पहला कदम बढ़ाया| 

ChandraYaan-2 को सफलतापूर्वक अपने (ISRO) इंटरनेशनल स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन श्रीहरिकोटा से एक रॉकेट का लॉन्च किया जिसे ChandraYaan-2 कहा जाता है|भारत ने ChandraYaan-2 को सफलतापूर्वक पृथ्वी के ऑर्बिट से धकेल कर चंद्रमा के ऑर्बिट तक पहुंचा दिया और बहुत ही आसानी से विक्रम लांचर को भी लॉन्च कर दिया| भारत का लक्ष्य तो बहुत ही महान है जो उस चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की जानकारी को इकट्ठा करना चाहता है परंतु जब पता चला कि विक्रम का संपर्क ऑर्बिट से टूट गया है | 
माना जाता है कि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव बहुत ही ठंडा प्रदेश है और यह भी माना जाता है और स्पष्ट रूप से नॉलेज भी करता है कि चंद्रमा एक ऐसी स्थिति में स्थापित है जहां सूर्य की किरणें कभी नहीं पहुंचती| इसे संचालित करने के लिए सौर सेल का उपयोग किया जा रहा है परंतु जब जिस क्षेत्र में सूरज की रोशनी पहुंचती ही नहीं हो वहां पर वह कैसे काम कर सकता है, इस प्रकार ChandraYaan-2 के बारे में अंदाजा लगाया जा सकता है, कि वहां उस क्षेत्र के वातावरण में पहुंचकर वह अपने आप को चालू नहीं कर पाया इसी वजह से उसका कनेक्शन हमारे मेन कनेक्शन से टूट गया जिस वजह से अभी तक उस यान से संपर्क नहीं हो पा रहा है अर्थात ऑर्बिट और विक्रम का संपर्क टूट चुका है जिस वजह से वजह से प्रज्ञान विक्रम के अंदर ही सुरक्षित बैठा हुआ है कोई भी प्रतिक्रिया नहीं हो रही है, इस बीच यही एक संभावना जताई जा सकती है,

ChandraYaan-2 के असफल होने का क्या कारण हो सकता है, आइए इसके बारे में चर्चा करते हैं|
आइए सबसे पहले इस बारे में बात करते हैं कि ChandraYaan-2 अपने चंद्रमा के मिशन पर किस जगह पर उतरने वाला था| चंद्रमा यान चंद्रमा की दक्षिणी ध्रुव वाली केंद्र पर उतरना चाहता था माना जाता है दक्षिणी ध्रुव वह इलाका है चंद्रमा का जहां पर सूर्य का प्रकाश भी नहीं पहुंचता अर्थात वहां पर बहुत ही ठंडा और बहुत ही अंधेरे वाला इलाका है|| और क्या कोई ऐसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया था जिसमें विक्रम अपने आप को संचालित कर सके या अपने गुजारे के लिए कुछ ऊर्जा का इस्तेमाल कर सके ऊर्जा का निर्माण कर सके|

ChandraYaan-2 का ऑर्बिट तो चक्कर काट रहा है, चांद के, बड़े ही अच्छी तरह से, क्योंकि वह उस क्षेत्र में है, जहां पर सूर्य का प्रकाश निरंतर-यान तक पहुंच रहा है, इसीलिए वह सुचारू रूप से कार्यरत है|| फिर ऐसा क्या हो गया अचानक कि दोनों के बीच में संपर्क टूट गया, मेरा कहने का मतलब है औरबिटर और विक्रम के बीच का संपर्क टूट गया और उसके बाद विक्रम से जब कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है, तो फिर विक्रम वहां क्या कर रहा होगा, इसकी जानकारी कैसे प्राप्त हो सकती है?                    
ChandraYaan-2 विक्रम सुचारू रूप से कार्यरत नहीं हो सकता है, तो हमें किसी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे विक्रम ऑटोमेटिक अपने आप ही अपने मशीन को ऊर्जा प्रदान कर सकें| 

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