क्या ईश्वर है अगर है तो कहां है हम तो इन्हें देख नहीं पा रहे तो फिर कैसे पता लगाएं कि भगवान है ईश्वर है हां हम यह जरूर कह सकते हैं कि यदि किसी चीज में विश्वास किया जाए तो वह सिद्ध हो जाती है और जब वह सिद्ध हो जाती है तो उसके बाद जैसा हम प्रणाम चाहते हैं वैसा ही होता है इसलिए हम यह मानने पर मजबूर हो जाते हैं कि वास्तव में विश्वास करने से विश्वास पैदा होता है इसी प्रकार से ईश्वर पर विश्वास करने से ही विश्वास पैदा हो जरूरी नहीं विश्वास से ही विश्वास पैदा होता है और विश्वास से ईश्वर पैदा होता है यह जरूरी है उदाहरण के तौर पर विश्व के लोगों ने अपनी भावना को व्यक्त करने और उसको पूरा करने के लिए किसी ना किसी से आग्रह जरूर किया है और यह विश्वास करके आग्रह किया है कि वह सामने वाला मेरी समस्या को सुनेगा और मेरी मदद करेगा और इसी आशा से वह विश्वास बना लेता ह है लोग अपनी मुरादे मांगते हैं उस ऊपर वाले से चाहे उसका नाम हो या ना हो पर उसमें विश्वास करते हैं और उनकी इच्छाएं पूरी होती है जैसे किसी के पुत्र नहीं है किसी के धन नहीं है किसी के व्यापम नहीं है किसी के संपन्नता नहीं है कोई सुखी नहीं है हर कोई भगवान से मांगता है और वह पूरा होता है अगर उसका विश्वास पूर्ण विश्वास के साथ मांगता है तो आप सोच सकते हैं कि जब हम किसी चीज में विश्वास करके उस कार्य को करते हैं और वह जब पूरा हो जाता है तो हमें कितना अच्छा लगता है कितना उल्लास महसूस होता है उसी प्रकार यह विश्वास भी चलता है कि हम यदि विश्वास के साथ कुछ करने के बारे में सोचें और उसको पूरा कर पाए तो यह पूर्ण हो जाता है यही ईश्वर का विश्वास है जी इसी प्रकार यदि आप यह मानते हैं कि भगवान हैं तो ईश्वर आपको कभी नहीं मिलेगा हां यदि आप यह मानते हैं कि ईश्वर है तो कहां है यदि आप उस की खोज करने लगेंगे और उसकी खोज करते-करते जीवन को वितरित करेंगे तो ईश्वर आपको एक ना एक दिन मिल ही जाएगा जिस प्रकार आपका विश्वास अटूट होगा उसी प्रकार ईश्वर आपको दर्शन देंगे जैसे आप किसी वस्तु को मांगने के लिए ईश्वर से विश्वास जमाते हैं उसी प्रकार ईश्वर को मांगने के लिए ईश्वर से विश्वास जगा सके यह सबसे करुणामाई कल्याणकारी भावना है इसके साथ ईश्वर का नाम जुड़ा है जय श्री हरि परंतु ईश्वर को पाने के लिए खोज करने के लिए कोई उचित रास्ता तो होना चाहिए कोई रास्ता ही नहीं होता कोई बताने वाला नहीं होता कोई समझाने वाला नहीं होता आपसी समझ इतनी परिपथ तो नहीं हुई है कि वह उस चीज को समझ सके फिर हम अपना रास्ता किस प्रकार बना सकते हैं यह प्रश्न बड़ा ही सर्वोत्तम प्रश्न है और इसका उत्तर बड़ा ही अद्भुत होना चाहिए यह इसकी खोज कैसे करें यह भी भगवान श्री हरि की कृपा से ही संभव है
आध्यात्मिक जीवन का सार spritual truth of world दोस्तो आपको मेरा प्यार भरा नमस्कार Sprital hindi Me आपका स्वागत हे, इसे भी पढ़े आस्था OR विश्वास का देश india, India is a country of faith आध्यात्मिक जीवन का सार यही हे की , ( में) वो है , जो देखता है , तथा में अपने सामने होने वाली घटनाओं , विचारों और भावनाओं के प्रति जागरूक हो अर्थात इस जीव जगत में सभी जगह भगवान श्री विष्णु ही समाये हुए है और वही हर जीव में से आत्मा नामक तत्त्व की सहायता से सब कुछ भली भाँति देखता रहता हे हमारी और सभी जीव-निर्जीव , तत्व-पदार्थ हर किसी की एक दृष्टि होती हे , आँख होती हे नज़्ज़ारिया अपना-अपना होता हे. महामुनि नारद जी भक्तो में परम भक्त और ज्ञानी में परम ज्ञानी परम प्रिय भक्तो के उच्चतर श्रेढ़ी में सुशोभित है भगवान श्री हरी का ही नाम सुमिरते रहते हे और सभी भक्तो को सदा यही कहते रहते है श्रीमान नारायण नारायण नारायण और भगवान की बनाई इस दुनिया का दर्शन करते और भगवान की महिमा और शक्ति की ज्योति से अपने मन की ज्योति को अनुभव कर...
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